behavior="scroll" height="30">हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि सम्मेलन संयोजक एवं हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि योगेन्द्र मौदगिल का हरियाणवी धमाल, हरियाणवी कविताएं, हास्य व्यंग्य को समर्पित प्रयास ( संपर्कः o9466202099 / 09896202929 )

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बुधवार, 28 जनवरी 2009

म्हारा ताऊ .......

या बात उन दिनों की सै जब म्हारा ताऊ बोम्बे मैं रहया करै था
एक दिन भाटिया जी का जी कर पडा अक ईबकै तो जरमनी जाता होया ताऊ नै मिल कै जाऊंगा सो आव देख्या ना ताव भाटिया जी म्हारी भाभी अर भतीज्जों नै लेकै ताऊ कै पहोंचगे
दिन तो आवभगत अर मजाकबाजी मैं कट ग्या
रात होगी

भाटिया जी का वहीं रहण का इरादा देख कै ताई बोली, रे बीजमरे, यो तेरा भाटिया जी तो न्यू लाग्गै अक कुणबे नै लेकै अड़ैई सोवेगा.......... अर म्हारै फालतू खाट कोनी.......... ईब के करैं..........
ताऊ बोल्या.......... ताई बणगी अर अकल रिवाड़ी छोड़ यायी........... इस म्हं चिंता के........... यहां पड़ौस मैं नीरज जी रहवैं सैं उनकै तै खाट मांग ल्यावांगें............ मैं ईब गया अर ईब आया

न्यू कहकै ताऊ नीरज जी कै चाल पडया
नीरज जी नै दरवज्जे की घंटी सुणी अर दरवाजा खोलते ही ताऊ नै देख कै खुसी तै चिल्लाया.............. वैलकम.. स्वागतम.. वैलकम.. स्वागतम..

ताऊ हंसते होए भीत्तर आग्या

नीरज जी बोल्ले, ताऊ इस टैम क्यूक्कर...?

ताऊ नै बगैर किसी भूमिका कै सारी बात बता दी....... अक भाई तेरे धौरै फालतू बैड पडया हो तो दे दे..

नीरज जी बोले
ताऊ तनै तो पता ई सै.... अक मैं झूठ नहीं बोलता.... अर साच्ची बात या सै.... अक म्हारे घर मैं दो बैड सैं... एक पै म्हारी घरआली अर म्हारी माता जी सोवैं.... अर दूसरे पै मैं अर मेरे पिता जी सोवैं...

ताई बोल्या, रै नीरज जी, मनै पता सै.... थम झूठ नहीं बोलते......... थमनै जिसा कहया सै उसा ही होगा........ पर भाई एक बात कहूं बैड देण कै तो मारो गोली पर सोया तो कम तै कम तरीकै तै करो..........
--योगेन्द्र मौदगिल

शनिवार, 3 जनवरी 2009

महा कमीण

एक बर की बात...
म्हारे महाकंजूस ताऊ के खानदानी पंडत नै बताया अक् ताऊ, अगर तू जिंदगी मैं और भी मजे लेण चाहवै तो पांच कमीणों को भोजन करवा दे...
ईब भाई ताऊ महा कंजूस... पांच कमीणों नै भोजन क्यूक्कर करवावै...?
सोच म्हं पड़ग्या....

ताई बोल्ली, रै ताऊ, सोच मैं ना पड़ै, तेरा जनम संवर जे गा, पांच कमीणों नै भोजन करवा दे....
ताऊ बोल्या पर पांच कमीण मिलेंगें कहां...?

ताई बोल्ली, घबरावै मत, गाम के बाहर पुलिस चौक्की सै, पांच पुलिसिये जिमा दे, बस होग्या काम....
ताऊ नै बी बात जंच गी अर उसनै पांच पुलिस आले जिमा दिये.....

सारे गाम म्हं रुक्का पड़ग्या..

अर अगले ई दिन बिजली वाले ताऊ के घरां पहोंचगे...
अर बोल्ले, रै ताऊ, तनै यै के करया, म्हारे महकमे की नाक कटवा दी... पांच पुलिसिये जिमा दिये.... तू तो मान्या होया कंजूस सै... नयू बता तनै यें क्यूं जिमाये.....?

ताऊ बिचारा सीधा सादा. साफ-साफ बता दी. अक भाई पंडत नै कहया था, अक पांच कमीण जिमाणें सैं, तो मन्नै पांच पुलिसिये जिमा दिये....

या सुणते ई बिजली आले नै ताऊ कै दो धरे.... अर बोलया.... रै ताऊ, तनै सरम कोनी आई...?

तनै पांच पुलिस आले जिमाये.... बस एक बिजली आले नै जिमा देत्ता....

तनै बेरा कोनी... एक बिजली आला पांच पुलिसियां के बरोब्बर सै.....

शनिवार, 20 दिसंबर 2008

ताऊ ताई दोनों फिल्मी

एक बर की बात भाई....
ताऊ का नवा-नवा ब्याह होया था. अक उसकी नौकरी घणी दूर लाग गी.
वो नवी-नवेल्ली ताई नै घरां छोड़ कै दूर देस म्हं चल्या गया.
वहां तो बस नौकरी अर फिल्में उसका सहारा थी पर वक्त बीत्या अर ताऊ लौट कै गाम मैं आया तो घरआली नै देखते ई गश खाग्या क्यूंकि घरआली पेट तै थी........

थोड़ी देर म्हं हिम्मत सी करके उठ्या एक फिलमी गीत गा कै बूझण लाग्या..

ये क्या हुआ कैसे हुआ कब हुआ कुछ तो बोलो.....

ताई नै बी पाछै घणी फिलम देख राक्खी थी..
गाणे मैं ई बोल्ली

यूं ही कोई मिल गया था सरे राह चलते-चलते
नोटः यह दृष्टांत असली ताऊ का नहीं नकली ताऊ का है

बुधवार, 15 अक्टूबर 2008

एक बै की बात......

एक बै की बात
प्यारे भाईयों और मेरी भाभियों
या लगभग साच्ची बात सै
इसमैं एक पहेली बी सै
बूझण आलै नै जरमनी के दो लट्ठ इनाम मैं मिलेंगें

उन दिनों ताऊ की नाई की दुकान थी
एक दिन ताऊ मजे मैं अपने गाहक के बाल बणा रहया था तो एक आदमी आया अर बोल्या ताऊ कितने नंबर सै
अर अंदाजा बता दे कितनी देर लगेगी
ताऊ बोल्या भाई घंटा लगेगा
आदमी चला गया

अगले दिन ताऊ फेर मजे मैं अपने गाहक के बाल बणा रहया था तो वही आदमी फेर आया अर बोल्या ताऊ कितने नंबर सै अर अंदाजा बता दे कितनी देर लगेगी
ताऊ बोल्या भाई पौणा घंटा लगेगा
आदमी चला गया

अगले दिन ताऊ फेर मजे मैं अपने गाहक के बाल बणा रहया था तो वही आदमी फेर आया अर बोल्या ताऊ कितने नंबर सै अर अंदाजा बता दे कितनी देर लगेगी
ताऊ बोल्या भाई आधा घंटा लगेगा
आदमी चला गया

अगले दिन ताऊ फेर मजे मैं अपने गाहक के बाल बणा रहया था तो वही आदमी फेर आया अर बोल्या ताऊ कितने नंबर सै अर अंदाजा बता दे कितनी देर लगेगी
ताऊ बोल्या भाई पंदरा मिनट लगेगी
आदमी चला गया

ताऊ नै सोच्चभ यू गाहक रोज आवै अर टाइम बूझ कै चल्या जावै बेठता कोनी के बात सै कोई रास्सा लाग्गै ताऊ नै फौरन अपना छोरा बुलाया अर बोल्या रै छोरे इस आदमी नै देख कै आ अक यू मेरे तै टैम पूछ कै कित जावै सै

छोरा पीछै गया
वापस आया अर उसनै जो ताऊ तै बताया सुण कै ताऊ के होस उड़गे
क्योंकि उसनै बताया अक यो आदमी जो रोज टेम पूछण आवै था
टेम पूछ कै सीधा ताऊ के घरां जावै था

अंदाजा ला कै बताऒ
वो आदमी कौण था
मिलेंगें जरमन के दो लट्ठ
--योगेन्द्र मौदगिल
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