behavior="scroll" height="30">हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि सम्मेलन संयोजक एवं हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि योगेन्द्र मौदगिल का हरियाणवी धमाल, हरियाणवी कविताएं, हास्य व्यंग्य को समर्पित प्रयास ( संपर्कः o9466202099 / 09896202929 )

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मंगलवार, 10 फ़रवरी 2009

हरियाणवी ग़ज़ल

ताऊ रामपुरिया को ताई सहित सादर समर्पित

इसी बात का रौला सै.
देख मकौड़ा धौला सै.

टूम पहन कै ठुमक रह्या,
वो बी कितना बौला सै.

बरगद सै हैरान घणा,
दो भिण्डी का कौला सै.

जो फसग्या सो घाल्लिया,
तन बी ससुरा झौला सै.

गुलदाणे मैं खुस्स होग्या
हनुमान तो भौला सै
--योगेन्द्र मौदगिल

बुधवार, 19 नवंबर 2008

कबुत्तर..........

हर दड़बे म्हं भरे कबुत्तर.
खोट्टे अर कुछ खरे कबुत्तर.

बिल्ली आवण के खटके तै,
हाय, रात-दिन्न डरे कबुत्तर.

लकवा मार गया लाला नै,
और बिचारे मरे कबुत्तर.

प्रेम की चिट्ठी कांख दबाकै,
गुटर-गुटरगू करै कबुत्तर.

माट्टी के माट्टी म्हं मिलज्यैं,
मटमैल्ले-भुरभुरे कबुत्तर.
--योगेन्द्र मौदगिल

बुधवार, 8 अक्टूबर 2008

टूटग्या टील्ला......

कुटम-कबील्ला पीसे का
इब्तो हिल्ला पीसे का

उसनै मारै सै दुनिया
वो सै ढील्ला पीसे का

देख करोड़ों का होग्या
अपणा किल्ला पीसे का

दमड़ी गई तो मरजेगा
वो मरघिल्ला पीसे का

झटका ऊप्परआले का
टूटग्या टील्ला पीसे का
--योगेन्द्र मौदगिल
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