एक बर की बात भाई....
ताऊ का नवा-नवा ब्याह होया था. अक उसकी नौकरी घणी दूर लाग गी.
वो नवी-नवेल्ली ताई नै घरां छोड़ कै दूर देस म्हं चल्या गया.
वहां तो बस नौकरी अर फिल्में उसका सहारा थी पर वक्त बीत्या अर ताऊ लौट कै गाम मैं आया तो घरआली नै देखते ई गश खाग्या क्यूंकि घरआली पेट तै थी........
थोड़ी देर म्हं हिम्मत सी करके उठ्या एक फिलमी गीत गा कै बूझण लाग्या..
ये क्या हुआ कैसे हुआ कब हुआ कुछ तो बोलो.....
ताई नै बी पाछै घणी फिलम देख राक्खी थी..
गाणे मैं ई बोल्ली
यूं ही कोई मिल गया था सरे राह चलते-चलते
नोटः यह दृष्टांत असली ताऊ का नहीं नकली ताऊ का है
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13 वर्ष पहले
घणी बुरी करी भाई ताऊ म्ह तो !
जवाब देंहटाएंरामराम !
बेचारी ताऊ गेल्लै तो घणी माडी होई.
जवाब देंहटाएंराम राम बहुत बुरा हुआ,लेकिन यह सब बाते आप को केसे मालूम??
जवाब देंहटाएंयूं ही कोई मिल गया था सरे राह चलते-चलते
जवाब देंहटाएं....
अरे मौदगिल साहब,
कहीं वो आप ही तो नहीं थे.
मौदगिल साहब,
जवाब देंहटाएंसरे राह चलते चलते जो मिल गया था...आख़िर वो है कौन ??
चलते चलते राह में कोई मिल गया था ..सब जरा बताये भी योगेन्द्र कौन मिला था . बढ़िया पोस्ट .
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