behavior="scroll" height="30">हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि सम्मेलन संयोजक एवं हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि योगेन्द्र मौदगिल का हरियाणवी धमाल, हरियाणवी कविताएं, हास्य व्यंग्य को समर्पित प्रयास ( संपर्कः o9466202099 / 09896202929 )

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सोमवार, 13 अक्टूबर 2008

मैं जाणूं सूं कितना अमीर सै तेरा मामा.....

एक बै की बात

भूतनाथ बड़ा चौड़ा होकै
क्रीम सैम्पू लगा कै
मूंह हाथ धोकै
जमीं ऊप्पर नै देखता होया ताऊ के गाम मैं घूम रह्या था

सामणै तै ताऊ आवै था

भूतनाथ बोल्या ताऊ राम राम

ताऊ नै देखया यू तो नवा सा सैंपल लागै जवाब मैं बोल्या राम राम भाई
अर पूछण लाग्या अक रै छोरे तू आजे देखया, कित तै आया

भूतनाथ बोल्या भूतलोक तै

अच्छा किसकै आया

उरै मेरा मामा रह्वै सै

अरै कुण सा भाई

चौधरी प्रेत सिंह तू नी जाणता के उसनै

ना भई

कमाल है ताऊ तू नहीं जाणता थारे एरिये का सबते अमीर सै मेरा मामा

अरै रहण दे छोरे मैं जाणूं सूं कितना अमीर सै तेरा मामा

क्यूं रहण द्यूं, बीसियैं किल्ले जमीन, बारा ट्रैक्टर, गयारा जीप, चौंतीस बाइक, उन्नीस मामियां सै मेरे मामे की

अरै रहण दे छोरे मैं जाणूं सूं कितना अमीर सै तेरा मामा, क्यूं भेद खुलवावै सै

कयूं इसा के ताऊ तनै बेरा कोनी चौंसठ भैंस सैं मेरे मामे की

अरै रहण दे छोरे मैं जाणूं सूं कितना अमीर सै तेरा मामा,
चौंसठ की चौंसठ भैंस नंगी फिरैं. उनतै कुछ पहराया तो जाता नी. अर रोला करता हांडरया, अमीर सै.. अमीर सै... अरै जिसकी भैंस, झोटी, ऊंटनी नंगी घूमती हों वो अमीर होये करै के
--योगेन्द्र मौदगिल

शुक्रवार, 26 सितंबर 2008

हम फेर पांच के पांच....

(असली ताऊ अर कतई असली भूतनाथ तै क्षमायाचना सहित)

एक बर की बात

भूतनाथ ताऊ धौरै आकै बूझण लाग्या अक् रै ताऊ मेरी भैंस बीमार होगी अर तेरी भैंस जिब बीमार होयी थी तो तनै उसतै के दिया था

ताऊ बोल्या रै भूतनाथ मन्नै तो उसतै माट्टी के तेल म्हं चीनी घोल कै प्यायी थी

भूतनाथ नुस्खा सुणते ई घरां चाल पड़्या

जाते ।ई माट्टी के तेल म्हं चीनी घोल कै भैंस तै प्यादी

पीते ही भैंस मर गी

भूतनाथ घणे गुस्से म्हं ताऊ धोरै आया अर बोलया ताऊ मनैं तेरा नुसखा करया अर मेरी तो भैंस मरगी

ताऊ बोल्या रै बावली बूच मेरी भैंस बी मरगी थी

भूतनाथ बोल्या फेर तनै मेरे तै बताया क्यूनी

ताऊ बोल्या रै बावली बूच तनै नुस्खा बूझ्या था असर कोनी

भूतनाथ मात्थे पै हाथ मार कै जलता-भुनता वापस चाल पडया
घरां पहोंचा तो खुस होग्या
घरां उसका ब्याह करण की बातचीत चाल री थी

भूतनाथ किलकारी मार कै बोल्या री मां इस टैम तो हम परिवार म्हं पांच जणे सैं, दादी, बापू, बेबे, मैं अर मां तू. कुल मिला कै पांच..
मां बोल्ली रै मेरे बावले पूत, चिन्ता ना करै, तरा ब्याह होते ई छह होजेंगें...

भूतनाथ बोल्या, री मां, फेर के,... इतनै बेबे का ब्याह हैजेगा वा चली जागी... हम फेर पांच के पांच...

मां बोल्ली, रै मेरे बावले पूत, इतनै तेरै छोरा होजेगा फेर तो हम छह होजेंगें....

भूतनाथ बोल्या, ना री मां, ना...., इतनै दादी मर जेगी... हम फेर पांच के पांच...
--योगेन्द्र मौदगिल

मंगलवार, 23 सितंबर 2008

ताऊ जब मर कै ऊप्पर पहोंचा तो..........

प्यारे जीवित पाठकों,
राम राम,,...!!!

ताऊ नै अपने जगप्रसिद्ध ब्लाग पै घणी साच्ची पोस्ट डाल्ली
इब सच बोल्लण तै परहेज़ अपना बी कोनी
prastut hai 1 sachhi post

लेकिन एक बात का ध्यान रखियो कि इस किस्से म्हं ताऊ अर मेरा जिक़र कोनी

तो भाइयों अर मेरी भाभियों
सुणो

एक बै की बात

एक ताऊ जब मर कै ऊप्पर पहोंचा तो सन्न रह ग्या सामणै दूसरा ताऊ खड़ा था

ताऊ बोल्या रै तू बी मर लिया

दूसरा बोल्या हां भाई मैं बी मर लिया

अरै क्यूक्कर मरया तू इबी तो मरण की उमर ना थी तेरी

तेरी कोण सी उमर थी तू बता क्यूक्कर मरा

बस्स रै भाई मेरी ना बूज्झै मैं तो सदमे तै मर ग्या तू क्यूक्कर मरा

मैं तो भाई ठंड तै मरग्या पर तेरे गेल के बणी इसा के चाला पाटग्या अक तू सदमे तै मरग्या

बस्स भाई नाए पूच्छै तो अच्छा

पूच्छू क्यूं नी ताऊ यू तो तनै बताणा इ पड़ेगा

सुण ले भाई फेर बात न्यू थी. मेरी चाल री थी नाइट ड्यूटी. अचानक कुछ हरकतों तै तेरी ताई पै मन्नै कुछ डाउट होग्या. मनै पता लगाण की बहोत कोशिस करी पर बेरा ना पाट्या. एक दिन मैं बाहर जाणे की कह कै घर तै चाल्या अर दो घंटे पाच्छै इ वाप्पस आ लिया. आ कै दरवाजा खटखटाया मनै कुछ आवाजें सी आई. थोड़ी देर म्हं दरवाजा खुलते इ मनै भीतर सारा कमरा छाण मारया पर कोय ना मिल्या. मनै पलंग के नीच्चै, परदे के पीच्छै, अलमारी के पाच्छै, रसोई मैं, टांड पै सारै नै देख मारया पर कोइ ना मिलया. पर भाई के बताऊं मनै अपने कानों तै आवाज सुणी थी अक भीतर कोई था. बस मनै तो अस बात तै इसा सदमा लगया अक मैं तो तुरंत मरग्या..

ताऊ बोल्या रै झकोई
जौ तू फ्रिज खोल कै देख लेत्ता तो ना मैं मरता और ना तू मरता
--योगेन्द्र मौदगिल

सोमवार, 22 सितंबर 2008

जज आफ हाइकोर्ट.......

एक बै की बात...
एक था ताऊ. जज था हाईकोर्ट म्हं.

(नोट मैं आदरणीय रामपुरिया जी कोट नहीं कर रहा हूं)

तो भाइयों अर मेरी भाभियों,
एक था ताऊ...
हाइकोर्ट का एक जज.
एक दिन्न अकेल्ला ही कार ले कै पहाड़ पै घूम्मण चल दिया. घूमते-घमते रात होगी, पर उसनै मजा आ रह्या था. घूमता रह्या. अचानक कार बंद होगी. हाइकोर्ट का जज ताऊ था अकेला. उसनै अपणे दिमाग के सारे घोड़े खोल लिये पर कार स्टार्ट ना होयी.

ताऊ नै दायें देख्या, बायें देख्या, इधर देख्या, उधर देख्या, अचानक उसनै देखया के थोड़ी दूर एक मकान म्हं बत्ती जल रही सै

बेचारा वहां पहुंचा....

जा कै कालबैल बजाई तो सुथरी सी मल्लिका सेरावत बरगी छोरी ऊप्पर खिड़की म्हं तै झांक कै बोल्ली........
कौण सै...?

ताऊ बोल्या.......... मैं सूं........

वा बोल्ली,... मैं कौण..? सही बता परिचय दे कोण सै तू..?

ताऊ बोल्या, मैं भई... भई... तुम डरो मत आय एम्म जज आफ हाइकोर्ट..!!

या सुण कै छोरी नीचै आगी अर गेट खोल दिया फिर बोली बताइये क्या बात है...?

ताऊ नै अपनी गड्डी बंद होणे की बात बताई.

वा बोल्ली तो फेर मैं के कर सकूं..?

ताऊ बोल्या, भई कर तो तू के सकै, पर मनै रात बिताण की जगह चाहिये..!!

वा बोल्ली, बात तो थारी ठीक सै, पर मैं यहां अकेल्ली सूं..!

ताऊ बोल्या, इस बात तै तनै के खतरा बावली, मनै तेरे तै बताया तो सै अक आय एम्म जज आफ हाइकोर्ट..!!

वा बोल्ली वा तो ठीक पर आज मेरे पति भी घर कोनी...

ताऊ बोल्या, फेर इस बात तै तनै के खतरा बावली, मनै तेरे तै बताया तो सै अक आय एम्म जज आफ हाइकोर्ट,,,,

वा बोल्ली, एक समस्या होर सै, मेरे धौरे सोण का कमरा बी एक....

ताऊ बोल्या, फेर मनै तेरे तै बताया तो सै अक आय एम्म जज आफ हाइकोर्ट.....

वा बोल्ली जी बात नै समझो......... ठंड के दिन्न अर मेरे धोरै रजाई बी एक सै......

ताऊ बोल्या, फेर इस बात तै तनै के खतरा बावली, मनै तेरे तै बताया तो सै अक आय एम्म जज आफ हाइकोर्ट....

ईब वा बोल्ली, फेर के सै झकोई आजा...

ताऊ वहीं रुका. रात बीत गई. सुबह हुई वा लुगाई चा का कप ले कै ताऊ धोरै आई..

बोल्ली, गुड मारनिंग..

ताऊ बोलया, गुड मारनिंग... नींद बहुत बढ़िया आई... पर मनै एक बात समझ मैं ना आई... के तुम्हारा यहां गुजारा कैसे चलता है..?

वा बोल्ली म्हारा एक मुर्गी फार्म सै, नीचै आ तनै दिखा दूं...

ताऊ उसके साथ चाल पड़ा...

नीचे मुरगी फारम में बहुत सारी मुरगिया देख कै ताऊ नै उस लुगाई तै एक प्रश्न करया, बोलया, एक बात बता भई यें सारी मुरगियां ही हैं या इनम्हं कोई मुरगा बी सै...?

वा बोल्ली जी एक चौथाई मुरगिया अक बाक्की मुर्गें सैं....

ताऊ हंस कै बोल्या....
कमाल सै मुरगियां कम, मुरगे ज्यादा, इन म्हं आपस म्हं मिलण खात्तर लड़ाई ना होत्ती..?

वा बोल्ली जी कतई बी लड़ाई ना होत्ती.... क्यूंकि आद्धे तै ज्यादा मुरगे तो जज आफ हाइकोर्ट सैं......
--योगेन्द्र मौदगिल

रविवार, 21 सितंबर 2008

ताऊ बोल्या....

एक बै की बात...
एक ताऊ था (मैं आदरणीय रामपुरिया जी की बात नहीं कर रहा हूं)

हां तो भाई एक था ताऊ. उमर लगभग ८० बरस. पता नी के चस्का चढया, के जी म्हं आया, अक् ताऊ नै एक २० साल की छोरी तै ब्याह कर लिया. तीन-चार महीन्ने होए तो ताऊ एक दन डाकटर धोरे पहुंच कै बोल्या डाक्टर साहब मन्नै न्यूं लाग्गै अक् मैं बाप बणन वाला सूं...

डाकटर बोल्या ताऊ बधाई... पर मैं तनै एक बात सुणाना चाहूं उसनै सुण ले

ताऊ बोल्या सुणा दे

डाकटर बोल्या, ताऊ एक शिकारी था. उसनै बहोत शेर-चीते मार राक्खे थे. एक दिन जब वो शिकार करण जंगल म्हं चाल्या पर गलती तै अपनी राइफल घरां भूलग्या. जंगल म्हं पहोंच्या इ था अक उसके सामने शेर आग्या. शेर नै दहाड़ मारी शिकारी नै बंदूक टोही तो सन्न रहगया. अक् रै बंदूक तो घरां ही रहगी पर शिकारी मैं आत्मविश्वास बहुत था उसनै हाथ मैं पकड़ रखी बेंत बंदूक वाली पोजीशन मैं शेर के मूंह कान्नी ताण दी

अचरच... महा अचरज.........
तभी धांय की आवाज आयी ऐसा लग्या बेंत म्हं तै गोली निकली सर शेर मरग्या.....
ईब बता ताऊ के समझा..?

ताऊ बोल्या रै डाक्टर बात साफ सै कोई लुका होया बंदा खडया था शिकारी के पाच्छै,
वो लेरह्या था बंदूक. गोली उसी म्ह तै चाल्ली वरना के बैंत मैं तै गोली चाल्लै ?

डाक्टर बोल्या ताऊ मैं तनै यूए समझाणा चाहूं था

समझग्या ना
--योगेन्द्र मौदगिल

सोमवार, 8 सितंबर 2008

पूच्छो क्यूं..?

बहुत पुरानी बात कोनी. ताऊ रामपुरिया, भाटिया जी, भूतनाथ और तिवारी साब चारों के चारों उस टेम कट्ठे रहे करते. गाम म्हं पूरे मजे थे चारों के.
एक दिन की बात सांझ नै चारों बतियावैं थे. चारों नै गाम म्हं रहणा घाट्टे का सौदा लग्या. विचार बणाया अक् शहर म्हं जाकै कोई ढंग का काम करेंगें. or peese kamavenge.
चारों पहुंचगे शहर वहां मिलग्या स्मार्ट सा स्मार्टबरगिया. इन्होनै सोच्ची इसतै सलाह कर लैं. काम जम जे गा. स्मार्ट बोल्या न्यू करो रै,
शहर म्हं गाड़िया बहोत सैं का गैरज खोल ल्यो. काम की कोय कमी नी.
चारों नै खोल लिया ....शानदार सर्विस सैंटर...
पर गजब... छः महीने तक एक गाहक नी आया.
पूच्छो क्यूं ?
मैं बताऊं.. गैरेज दूसरी मंजिल पै खोल्या..
फेर पहोंचगे स्मार्ट धौरै, बोल्लै रै, कोई और काम बता...
स्मार्ट धौरै आइडियों का स्टाक फुल्ल.
बोल्या झकोइयों, िमठाई की दुकान खोल ल्यो. घणी चाल्लेगी.
आव देख्या ना ताव खोल ली मिठाई की दुकान.
पर गजब.... छः महीने तक एक गाहक नी आया
पूच्छो क्यूं..?
मैं बताऊं... दुकान पै तै सर्विस सैंटर का बोर्ड तो हटाया ई नी
फेर पहोंचगे स्मार्ट धौरै, बोल्लै रै, कोई और काम बता.
स्मार्ट धौरै आइडियों का स्टाक फुल्ल..
बोल्या रै झकोइयों, थम दुकानदारी नी कर सकते. न्यू करो एक टैक्सी डाल ल्यो. सवारियां बहोत सैं दिल्ली चंडीगढ़ रूट पै. ठाठ तै सारा दिन ढोते रहियै.
चारों नै आव देख्या ना ताव टैक्सी daal lee.
पर गजब... छः महीने तक एक सवारी नी बेट्ठी
पूच्छो क्यूं..?
स्टैंड पै टैक्सी ला कै दो आग्गै बेठ जैं थे दो पीच्छै. ईब थमी सोच्चो सवारी के छात पै बेट्ठण वास्तै आत्ती.
परेसान होगे. किसी नै कह दिया अक रै थारे बस का कोनी चुपचसप गाम म्हं वापस चले जाऒ.
चारों अपनी नवी टैक्सी मैं बेठ वापस गाम मैं चाल पड़े.
कुदरत की मार रास्तै म्हं गाड्डी खराब होके बंद होगी. चारों नै दिमाग के सारे घोड़े खोल लिये पर कार स्टार्ट ना होयी.
एक राह चलता बोल्या रै क्यूं बिराण होरे सो, धक्का मार कै मकैनिक धोरे ले जो..
चारों धक्का मारणा लागगे..
पर अचरज की बात एक हफ्ता धक्का लगाया पर गाड़ी एक इंच ना सरकी.
पूच्छो क्यूं..?
मैं बताऊं दो जणे आग्गे तै धक्का लावैं थे सर दो पाच्छे तै.......

गुरुवार, 21 अगस्त 2008

पलूरा (कुत्ते का पिल्ला)

लै सुण ले ताऊ, नवा किस्सा...
गाम म्हं एक मौल्लड़ था. ब्याह उसका होया कोनी. उसनै एक पलूरा पाल राख्या था. सुसरे नै एक कसूत आदत थी ताऊ, अक् तड़के-सांझ कूए पै जा खड़्या होवै था ऒड़ै साब्बत गाम की बहू-बेटियां पाणी भर्या करती अर् मौल्लड़ सुसरा उनपै कमैंट कर्या करता..
उसका कमैंट करण का स्टाइल बी गजब था, पलूरे के बहाने करता...
जैसे सामणै तै कोए बहू पाणी की टोकणी ल्यारी होत्ती तो मौल्लड़ कहता, है रै पलूरे.. देक्खे के.. आज तो टोकणी मटकती चाल्लै..
और कोए बहू पाणी की टोकणी ल्यारी होत्ती तो मौल्लड़ कहता, है रै पलूरे.. देक्खे के.. आज तो ऊप्पर लग पाणी भर राखया
कोए बहू पाणी की टोकणी ल्यारी होत्ती तो मौल्लड़ कहता, है रै पलूरे.. देक्खे के.. आज तो लाल सूट म्हं पाणी जा सै
बहूऐं थी तो परेसान पर लाचार बी.
गाम म्हं एक पहलवान का ब्याह होग्या. उसकी नवी नवी लुगाई बी पाणी लेण कूए पै ऐण लाग्गी. मौल्लड़ पै के रह्या जावै था, बोल्या, है रै पलूरे.. देक्खे के.. आज तो जमां नवा नवा पाणी जा सै.
बहू नै अणसुनी कर दी अगले दिन फेर वही. मौल्लड़ फेर बोल पड्या, है रै पलूरे.. इस तात्ते पाणी मैं तो घणा मजा आत्ता होगा..
दुखी हो के बहू नै घरां जा कै अपने पहलवान खसम तै सारी बात बता दी. बस फेर के था पहलवान नै छो (गुस्सा) आग्या. सर पकड़ कै मौल्लड़ धुन्न दिया. तसल्ली का तोड़्या.
चार-पांच दिन तो मौल्लड़ बिस्तरे पै पडया रह्या. छटे दिन आ खड्या होया कूए पै. पलूरा ले कै.
पहलवान की बहू आई टोकणी भर कै.
देखते ई, मौल्लड़ कराहता होया बोल्या..
हाय रै पलूरे... इसी इसी बात के घरां बताण की होए करैं....
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