छूटग्या इब देस राणी.
चल चलैं परदेस राणी.
क्यूं बिमारी नै बुलावै,
छोड़ आल्ला खेस राणी.
हम जमूरे-वो मदारी,
सै गजब परमेस राणी.
एक तोत्ता-एक पिंजरा,
और सौ-सौ देस राणी.
अपणों का मारा गुजरग्या,
सह ना पाया ठेस राणी.
चोर था नाम्मी-गराम्मी,
रक्खे सौ-सौ भेस राणी.
फीस म्हं थोड़ी कसर थी,
फिर बिगड़ग्या केस राणी.
बात सबकी मान 'मुदगिल',
हो गया दरवेस राणी.
--योगेन्द्र मौदगिल
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14 वर्ष पहले

गजब की मार है आपकी कविता में !
जवाब देंहटाएंफीस म्हं थोड़ी कसर थी,
जवाब देंहटाएंफिर बिगड़ग्या केस राणी.
बेहतरीन व् लाजवाब ! बधाई !
छूटग्या इब देस राणी.
जवाब देंहटाएंचल चलैं परदेस राणी.
योगेन्दर जी बहुत ही सुन्दर भाव
धन्यवाद
फीस म्हं थोड़ी कसर थी,
जवाब देंहटाएंफिर बिगड़ग्या केस राणी.
बात सबकी मान 'मुदगिल',
हो गया दरवेस राणी.
योगेन्द्र जी बहुत अच्छी रचना है !!!!!!!