behavior="scroll" height="30">हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि सम्मेलन संयोजक एवं हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि योगेन्द्र मौदगिल का हरियाणवी धमाल, हरियाणवी कविताएं, हास्य व्यंग्य को समर्पित प्रयास ( संपर्कः o9466202099 / 09896202929 )

रविवार, 25 जनवरी 2009

पीसे का..........

कुटुमकबीला पीसे का.
इब्तो हील्ला पीसे का.

उसनै मारै सै दुनिया,
वो सै ढील्ला पीसे का.

देख करोंड़ों का होग्या,
अपणा कील्ला पीसे का.

गई जो दमड़ी मरज्येगा,
वो मरघिल्ला पीसे का.

झटका ऊप्परआले का,
टूटग्या टील्ला पीसे का.
--योगेन्द्र मौदगिल

2 टिप्‍पणियां:

  1. वह क्या खेल है इस पीसे का.....
    धन्यवाद

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  2. बहुत सही कहा आपने.

    गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाएं.

    रामराम.

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