behavior="scroll" height="30">हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि सम्मेलन संयोजक एवं हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि योगेन्द्र मौदगिल का हरियाणवी धमाल, हरियाणवी कविताएं, हास्य व्यंग्य को समर्पित प्रयास ( संपर्कः o9466202099 / 09896202929 )

गुरुवार, 30 अक्तूबर 2008

लोग भैंस नै चूम रह्ये....

बालक नांगे घूम रह्ये
बाप नसे म्हं झूम रह्ये

घरवाली तो भाज गयी
लोग भैंस नै चूम रह्ये

ताऊ घुसग्या बोत्तल म्हं
देख भट्योड़े घूम रह्ये

नई नसल सै ऊत घणी
पर दाद्दे मजलूम रह्ये

बखत बदलग्या कुरड़ी का
पैहर कबाड़ी टूम रह्ये

इब्तो अफसर बणगे रै
कल तक सुसरे डूम रह्ये
--योगेन्द्र मौदगिल

7 टिप्‍पणियां:

  1. इब्तो अफसर बणगे रै
    कल तक सुसरे डूम रह्ये
    बहुत गजब की रचना ! मजा आगया ! शुभकामनाएं !

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  2. ताऊ घुसग्या बोत्तल म्हं
    देख भट्योड़े घूम रह्ये
    ये ताऊ तो बोतल में घुसाने लायक ही है ! ढक्कन और लगा दीजिये ! :)

    बहुत मजा आया !

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  3. ये टिप्पण-डिब्बा किम्मैं डोल रह्ये
    या फेर टिप्पणकार ही झूम रह्ये

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  4. बालक नांगे घूम रह्ये
    बाप नसे म्हं झूम रह्ये
    भाई हकीकत है। लेकिन ताऊ को बोतल भी पव्वा भी। म्हारे में के खराबी सैं।

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  5. घरवाली तो भाज गयी
    लोग भैंस नै चूम रह्ये
    भाई भाजी नही लिव इन करने गई होगी
    योगेन्दर जी मजा आ गया आज आप की कविता पढ कर सही लिखा है आज कल के हालात पर, धन्यवाद

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  6. अहा-अहा योगी बड्डे, बहुत उम्दा मज़ा आ गया!

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