बालक नांगे घूम रह्ये
बाप नसे म्हं झूम रह्ये
घरवाली तो भाज गयी
लोग भैंस नै चूम रह्ये
ताऊ घुसग्या बोत्तल म्हं
देख भट्योड़े घूम रह्ये
नई नसल सै ऊत घणी
पर दाद्दे मजलूम रह्ये
बखत बदलग्या कुरड़ी का
पैहर कबाड़ी टूम रह्ये
इब्तो अफसर बणगे रै
कल तक सुसरे डूम रह्ये
--योगेन्द्र मौदगिल
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2 हफ़्ते पहले








इब्तो अफसर बणगे रै
प्रत्युत्तर देंहटाएंकल तक सुसरे डूम रह्ये
बहुत गजब की रचना ! मजा आगया ! शुभकामनाएं !
ताऊ घुसग्या बोत्तल म्हं
प्रत्युत्तर देंहटाएंदेख भट्योड़े घूम रह्ये
ये ताऊ तो बोतल में घुसाने लायक ही है ! ढक्कन और लगा दीजिये ! :)
बहुत मजा आया !
प्रत्युत्तर देंहटाएंये टिप्पण-डिब्बा किम्मैं डोल रह्ये
या फेर टिप्पणकार ही झूम रह्ये
बालक नांगे घूम रह्ये
प्रत्युत्तर देंहटाएंबाप नसे म्हं झूम रह्ये
भाई हकीकत है। लेकिन ताऊ को बोतल भी पव्वा भी। म्हारे में के खराबी सैं।
घरवाली तो भाज गयी
प्रत्युत्तर देंहटाएंलोग भैंस नै चूम रह्ये
भाई भाजी नही लिव इन करने गई होगी
योगेन्दर जी मजा आ गया आज आप की कविता पढ कर सही लिखा है आज कल के हालात पर, धन्यवाद
बङी मजेदार रचना है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंअहा-अहा योगी बड्डे, बहुत उम्दा मज़ा आ गया!
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