behavior="scroll" height="30">हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि सम्मेलन संयोजक एवं हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि योगेन्द्र मौदगिल का हरियाणवी धमाल, हरियाणवी कविताएं, हास्य व्यंग्य को समर्पित प्रयास ( संपर्कः o9466202099 / 09896202929 )

शुक्रवार, 26 सितंबर 2008

हम फेर पांच के पांच....

(असली ताऊ अर कतई असली भूतनाथ तै क्षमायाचना सहित)

एक बर की बात

भूतनाथ ताऊ धौरै आकै बूझण लाग्या अक् रै ताऊ मेरी भैंस बीमार होगी अर तेरी भैंस जिब बीमार होयी थी तो तनै उसतै के दिया था

ताऊ बोल्या रै भूतनाथ मन्नै तो उसतै माट्टी के तेल म्हं चीनी घोल कै प्यायी थी

भूतनाथ नुस्खा सुणते ई घरां चाल पड़्या

जाते ।ई माट्टी के तेल म्हं चीनी घोल कै भैंस तै प्यादी

पीते ही भैंस मर गी

भूतनाथ घणे गुस्से म्हं ताऊ धोरै आया अर बोलया ताऊ मनैं तेरा नुसखा करया अर मेरी तो भैंस मरगी

ताऊ बोल्या रै बावली बूच मेरी भैंस बी मरगी थी

भूतनाथ बोल्या फेर तनै मेरे तै बताया क्यूनी

ताऊ बोल्या रै बावली बूच तनै नुस्खा बूझ्या था असर कोनी

भूतनाथ मात्थे पै हाथ मार कै जलता-भुनता वापस चाल पडया
घरां पहोंचा तो खुस होग्या
घरां उसका ब्याह करण की बातचीत चाल री थी

भूतनाथ किलकारी मार कै बोल्या री मां इस टैम तो हम परिवार म्हं पांच जणे सैं, दादी, बापू, बेबे, मैं अर मां तू. कुल मिला कै पांच..
मां बोल्ली रै मेरे बावले पूत, चिन्ता ना करै, तरा ब्याह होते ई छह होजेंगें...

भूतनाथ बोल्या, री मां, फेर के,... इतनै बेबे का ब्याह हैजेगा वा चली जागी... हम फेर पांच के पांच...

मां बोल्ली, रै मेरे बावले पूत, इतनै तेरै छोरा होजेगा फेर तो हम छह होजेंगें....

भूतनाथ बोल्या, ना री मां, ना...., इतनै दादी मर जेगी... हम फेर पांच के पांच...
--योगेन्द्र मौदगिल

6 टिप्‍पणियां:

  1. आप सही लिख रहे हैं ! ये भूतनाथ अक्ल से पैदल ही है ! अब इसका बुखार
    उतरने लगा है ! आज कल बुखार के बाद इसने रूप बदल लिया है ! पूरा
    मायावी दीखता है ये तो !

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  2. ये ताऊ हमको बहुत बेवकूफ बना रहा है ! आपने सही लिखा है ! हम
    अगर अपनी औकात पर आ गए तो फ़िर देख लेंगे ! और तिवारी साहब
    भी कुछ कम नही हैं ! ये सब आपस में मिले हुए हैं और मेरा शोषण करते हैं !
    अब मैं रूप बदलू या कुछ भी करू ? इनको इससे क्या ? अभी मेरा
    बुखार उतरने दो , फ़िर देखना मेरा रूप बदलना ! आख़िर हम अपनी भूत
    वाली औकात दिखाएँगे, तभी मानेंगे सब !

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  3. भोत जोरदार सोट्टा मारया थमनै तो ! भाई थारी और तिवारी साहब की
    उत्पति इस भूत नाथ नै ले जावो यार ! यो म्हारे पीछे लाग लिया आज कल !
    आज बोल रया सै की इबी एक कविता छापूंगा ! :)

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  4. योगेन्द्र जी यह मजे दार पोस्ट केसे बच गई मेरी नजर से , भाई मजा आ गया, लगता हे भुत नाथ का बुखार अभी पुरी तरह से नही उतरा, ओर वो तो भगवान का शुकर भुतनाथ ने भेंस की दवा पुछी, कही अपनी दवा पुछ लेता तो ....
    धन्यवाद

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  5. हाहाहा ..बढ़िया है पाँच के पाँच ..मजा आ गया पढ़कर ...
    इस लेख में अगर कोई मास्टर जी नम्बर देते तो पाँच में पाँच ही देते

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  6. sir bahut achha
    haryavi sikh raha hu aap se aur tau se
    naya pacemaker dil ke liye
    padharen
    regards

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