behavior="scroll" height="30">हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि सम्मेलन संयोजक एवं हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि योगेन्द्र मौदगिल का हरियाणवी धमाल, हरियाणवी कविताएं, हास्य व्यंग्य को समर्पित प्रयास ( संपर्कः o9466202099 / 09896202929 )

मंगलवार, 23 सितंबर 2008

ताऊ जब मर कै ऊप्पर पहोंचा तो..........

प्यारे जीवित पाठकों,
राम राम,,...!!!

ताऊ नै अपने जगप्रसिद्ध ब्लाग पै घणी साच्ची पोस्ट डाल्ली
इब सच बोल्लण तै परहेज़ अपना बी कोनी
prastut hai 1 sachhi post

लेकिन एक बात का ध्यान रखियो कि इस किस्से म्हं ताऊ अर मेरा जिक़र कोनी

तो भाइयों अर मेरी भाभियों
सुणो

एक बै की बात

एक ताऊ जब मर कै ऊप्पर पहोंचा तो सन्न रह ग्या सामणै दूसरा ताऊ खड़ा था

ताऊ बोल्या रै तू बी मर लिया

दूसरा बोल्या हां भाई मैं बी मर लिया

अरै क्यूक्कर मरया तू इबी तो मरण की उमर ना थी तेरी

तेरी कोण सी उमर थी तू बता क्यूक्कर मरा

बस्स रै भाई मेरी ना बूज्झै मैं तो सदमे तै मर ग्या तू क्यूक्कर मरा

मैं तो भाई ठंड तै मरग्या पर तेरे गेल के बणी इसा के चाला पाटग्या अक तू सदमे तै मरग्या

बस्स भाई नाए पूच्छै तो अच्छा

पूच्छू क्यूं नी ताऊ यू तो तनै बताणा इ पड़ेगा

सुण ले भाई फेर बात न्यू थी. मेरी चाल री थी नाइट ड्यूटी. अचानक कुछ हरकतों तै तेरी ताई पै मन्नै कुछ डाउट होग्या. मनै पता लगाण की बहोत कोशिस करी पर बेरा ना पाट्या. एक दिन मैं बाहर जाणे की कह कै घर तै चाल्या अर दो घंटे पाच्छै इ वाप्पस आ लिया. आ कै दरवाजा खटखटाया मनै कुछ आवाजें सी आई. थोड़ी देर म्हं दरवाजा खुलते इ मनै भीतर सारा कमरा छाण मारया पर कोय ना मिल्या. मनै पलंग के नीच्चै, परदे के पीच्छै, अलमारी के पाच्छै, रसोई मैं, टांड पै सारै नै देख मारया पर कोइ ना मिलया. पर भाई के बताऊं मनै अपने कानों तै आवाज सुणी थी अक भीतर कोई था. बस मनै तो अस बात तै इसा सदमा लगया अक मैं तो तुरंत मरग्या..

ताऊ बोल्या रै झकोई
जौ तू फ्रिज खोल कै देख लेत्ता तो ना मैं मरता और ना तू मरता
--योगेन्द्र मौदगिल

7 टिप्‍पणियां:

  1. भाई मौदगील जी , एक बात तो मेरे समझ आ गई की मेरी जन्म पत्री
    आपके हाथ में है या फ़िर ताऊ रामपुरिया के ! अब आप दोनों से निवेदन है की मुझे आप सीधे से बता दो की मैं कौन से ताऊ का
    भूत हूँ ? और ये भी पक्का हो गया की मैं हूँ किसी हरयाणवी ताऊ का ही भूत ! अब मुझे मेरी पहचान चाहिए ! अब सीधे से बता दो
    नही तो मैं भूत हूँ , कुछ भी कर सकता हूँ ! तुम दोनु भाई तो मजे ले रहे हो और मुझे हरयाणवी होते हुए भी मजे से महरूम
    होना पड़ रहा है ! और हाँ मुझे तुम दोनों से मेरा हिस्सा भी चाहिए ! :) आख़िर कब तक मैं तिवारी साहब के घर में पडा रहूंगा !
    तुम दोनों तय कर लो ! या तो मुझे इज्जत से घर लिवा ले जावो नही तो मैं ख़ुद आ रहा हूँ ! और हाँ मुझे आज एक कविता भी
    नाश्ते में भिजवा देना ! :)

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  2. बहुत खूब. हरयाणवी में चुटकुला कुछ और ही मजेदार हो जाता है.

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  3. मौदगिल जी - आपका चुटकुला तो बहुत ही मजेदार है, धन्यवाद!

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  4. मौदगिल साहब, बहुत ही मजेदार किस्सा था !!

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  5. जौ तू फ्रिज खोल कै देख लेत्ता तो ना मैं मरता और ना तू मरता

    इब भाई यो सुसरी का कुण सा ताऊ आग्या ?

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  6. बहुत दिनो बाद खुलकर हँसा.
    धन्यवाद.

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  7. योगेन्द्र जी घणा मजा आ गया , यह भुतनाथ सदमे वाला ताऊ हे या फ़्रिज वाला... जरुर बताना मेने इन दोनो ताऊओ से पेसे लेने हे, जरा पता लग जाये तो इस भुतनाथ से हिसाब कर लु... यह हमारे ताऊ ओर तिवारी साहब जी* की पोल खोलने लगा हे.जब तक भुत था ठीक था अब इंसानो वाले काम करने लगा हे..
    धन्यवाद

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