behavior="scroll" height="30">हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि सम्मेलन संयोजक एवं हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि योगेन्द्र मौदगिल का हरियाणवी धमाल, हरियाणवी कविताएं, हास्य व्यंग्य को समर्पित प्रयास ( संपर्कः o9466202099 / 09896202929 )

रविवार, 31 अगस्त 2008

ताऊ और मल्लिका शेरावत

एक बर की बात. उन दिनों ताऊ लकड़िया काट्टण जंगल म्हं जाया करता.
एक दिन धूप तेज थी. ताऊ लकड़ियां काटता काटता थकग्या. अर थकान के मारे वहीं जंगल मैं कूएं की मुंडेर पै अपणी कुल्हाड़ी धर कै पड़गया. सीली सीली बाल लगी तो ताऊ के नींद का झटका लागग्या. नींद मैं ताऊ नै ली करवट तो उसकी कुल्हाड़ी कूए म्हं जा पड़ी. छपाक की तेज आवाज सुण कै ताऊ उठग्या, देख्या, कुल्हाड़ी गिरगी... बस्स ताऊ तो जोर जोर तै रोण लागग्या.
उसकी रोवण की कसुत्ती आवाज सुण कै कूए म्हं तै जलदेवता प्रकट होए और बोल्लै रै ताऊ क्यूं रोवै सै,
ताऊ बोल्या रै जलदेवता के बताऊं मेरी आजीविका का साधन मेरी कुल्हाड़ी इस कूए म्हं पड़गी ईब मैं के करूंगा.... अर क्यूक्कर करूंगा
जल देवता बोल्या रै बस इतनी सी बात. चिन्ता ना करै. मैं इब्बे ल्याया काढ़ कै तेरी कुल्हाड़ी....
कह कर कै जलदेवता कूए म्हं गये अर एक मिनट म्हं ही एक सोने की कुलहाड़ी ले कै बाहर आए अर ताऊ तै बोल्ले लै संभाल अपनी कुल्हाड़ी रोना बंद कर कै घरां जा..
ताऊ बोल्या रै जलदेवता या सोने की कुल्हाड़ी मेरी कोनी मेरी तो लोहे की थी वाहे लेऊंगा..
जल देवता बोल्या अच्छा रै चल चिन्ता ना करै मैं हटकै ल्याया काढ़ कै तेरी कुल्हाड़ी..
कह कर कै जलदेवता कूए म्हं गये अर फिर एक मिनट म्हं ही एक चांदी की कुल्हाड़ी ले कै बाहर आए अर ताऊ तै बोल्ले लै संभाल अपनी कुल्हाड़ी रोना बंद कर कै घरां जा...
ताऊ बोल्या रै जलदेवता या चांदी की कुल्हाड़ी मेरी कोनी मेरी तो लोहे की थी वाहे लेऊंगा..
जल देवता बोल्या, अच्छा रै... चल चिन्ता ना करै मैं फेर ल्याया काढ़ कै तेरी कुल्हाड़ी..
कह कर कै जलदेवता कूए म्हं गये अर फिर एक मिनट म्हं ही वाए लोहे की कुल्हाड़ी ले कै बाहर आए अर ताऊ तै बोल्ले मैं तेरी ईमानदारी तै बहोत खुस हूं लै संभाल तीनों कुल्हाड़ी अर रोना बंद कर कै घरां जा..
ताऊ तीनों कुल्हाड़ी लेकै जलदेवता का धन्यवाद करके घरां चाल पड़या.
घरां पौंचते ही ताऊ नै ताई तै सारी कथा सुणाई तीनों कुल्हाड़ियां दिखाइ..
ताई नै सुणते ई काढ़ लिया जरमनी वाला लट्ठ बोली, नासपीट्टे... जवानी रोये...
उमर बीतगी ढंग का काम तनै एक नी करया उस कूए म्हं और पता नी के के होगा.... चाल मनै दिखा...
ताऊ जरा सा झिझक्या.
ताई बोल्ली,
तू मनै नूं बेवकूफ कोनी बणा सकै चाल तेरे साथ जंगल म्हं चालूंगी मनै दिखा कित सै वो कूआ अर कित सै तेरा जलदेवता
ताऊ की भला के चाल्लै थी बिचारा ले के ताई नै चाल पड़या...
जंगल म्हं कूए पै जाकै बता दिया अक् या सै वो कूआ...
ताई बोल्ली, जलदेवता दिखा...
ताऊ बोल्या, भीत्तर सै.. झांक ले....
ताई झांकण लाग गी. जिब जलदेवता ना दिखया ताई और झुकगी. जलदेवता फेर ना दिखया तो ताई और झुकगी. इतने मैं हवा का झोंक्का आया सर ताई कूए म्हं जा पड़ी....
ताऊ हैरान, परेसान, हलकान फेर जोर जोर तै रोण लागग्या..
जलदेवता बाहर आया अर ताऊ नै देख कै बोलया रै ताऊ ईब के होगया क्यूं रोवै सै..
ताऊ नै सारी कथा कह सुणाई अर बोल्या देवता जी ताई बिना घर कोनी चाल्लै वा तो काढ़णी ए पड़ेगी..
जलदेवता बोल्या अच्छा भाई ल्याऊं काढ़ कै..
जलदेवता नै डुबकी लगाई अर एक्के मिनट म्ह मल्लिका शेरावत नै लेकै बाहर आगे अर बोले देख ताऊ या ए सै के...
ताऊ बोल्या बिलकुल महाराज याही सै...
जलदेवता बोल्या रै ताऊ, कोई बात नी तू इस्से नै ले जा.. पर मन्नै एक बात बता दे अक् कुल्हाड़ी वाले मामले मैं तनै सोन्ने, चांदी का बी लालच कोनी करया ईब इस चमड़े की चीज नै देख कै तेरा ईमान क्यूं डगमगाग्या..
ताऊ बोल्या रै देवता, ईमान की बात कोनी..
बात न्यूं सै अक् ईब मैं इसनै नाट जात्ता तो तू अगली डुबकी मैं करीना कपूर काढ़ ल्याता मैं उसनै बी नाटता तब अगली डुबकी मैं तू असली ताई ल्याता. अर मेरे पै खुस्स होकै कहता कि मैं तेरी ईमानदारी तै बहुत खुश हूं. चल रोवै ना अर तीन्नों लेजा.
अरै जलदेवता यां एक्के ई नी संभलती..
तीनुंआ का के अचार घालता

7 टिप्‍पणियां:

  1. इसनै नाट जात्ता तो तू अगली डुबकी मैं करीना कपूर काढ़ ल्याता मैं उसनै बी नाटता तब अगली डुबकी मैं तू असली ताई ल्याता. अर मेरे पै खुस्स होकै कहता कि मैं तेरी ईमानदारी तै बहुत खुश हूं. चल रोवै ना अर तीन्नों लेजा.
    अरै जलदेवता यां एक्के ई नी संभलती..
    तीनुंआ का के अचार घालता ?


    भाई यो भाटियाजी नै जब तैं मेड इन जर्मनी लट्ठ
    ताई क हाथ म्ह दे दिया तब तैं मलिका शेरावत से ही काम चलाणा पडे सै ! इब सोचु कै मलिका शेरावत न भी वो ऐ कुए म्ह पटक आऊं ! त जल देवता इबकै करीना कपूर पकडा देगा ! पर भई डर भी लागै सै की पहलम झटकै ही जल देवता कदे ताई न काढ कै थमादी त उसके हाथ का लट्ठ देख मना भी ना कर सकू |
    और मलिका भी हाथ तैं निकल ज्यागी !

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  2. बहुत अच्छा किस्सा सुनाया है ! कभी हमारी दुनिया में आकर हमारी बात सुनो ! हम आपको भी दिला देंगे ! हमारी दुनिया में एक से एक पुराने जमाने की हिरोइन हैं ! आओगे ना ? अगर डर लगे तो मत आना !

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  3. योगेन्दर जी आप तो अन्दर की बात भी झट से सब को बता देते हो, भाई ताऊ हमारा बहुत ही सीधा हे, लेकिन अकल से कच्चा नही, ताउ ने मेरी जेब भी देख ली होगी, भाई गरीब भाटिया अब बार बार लट्ट खरीद खरीद कर केसे भेजे गा, ओर खाने भी तो उसने ही हे, इस लिये दोनो की इज्जत रह गई , लेकिन वो मलिका शेरावत नही हमारी ताई ही हे, भाई हमारा ताऊ शरीफ़ हे, बिलकुल उस बुढी भेंस की तरह से, जो राजा के निक्कमे दरवारियो ने दे दी थी

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  4. योगेन्द्र जी,

    इस गूढ़ ज्ञान सारी दुनिया के साथ बांटने के लिए धन्यवाद!!!!!!!!!! बहुत अच्छी पोस्ट है!!!!!!!!!!

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  5. वाह ताऊ क्या कहानी सुनाया से. सर बहुत अच्छी कहानी सुनाई. आज कल इस तरह के हास्य की जरुरत सभी के लिए बहुत जरुरी हो गयी है. जिंदगियों में आज इतना तनाव घुल गया है की पूछिये मत. आपका ये स्लोगन तो बहुत अच्च्छा है हास्यमेव जयते.

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  6. achchaa laga
    purani kahani yaad dilai
    fir naye ko baklsha nahi
    well written

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  7. भाई साब मुझे भी उस कुएं का पता बता दें तो मेहराबानी होगी मै भी कुएं मे भृष्टाचार,बेइमानी की गठरी डालूगां और जल देवता से कहूगां की उसके बदले मुझे दूसरी गठरी दे जिसमे इमानदारी और सदाचर हो।

    शेष फ़िर कभी.....
    www.kamiyaa.com

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