behavior="scroll" height="30">हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि सम्मेलन संयोजक एवं हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि योगेन्द्र मौदगिल का हरियाणवी धमाल, हरियाणवी कविताएं, हास्य व्यंग्य को समर्पित प्रयास ( संपर्कः o9466202099 / 09896202929 )

सोमवार, 5 मई 2008

योगेन्द्र मौदगिल की गजल

खेत बेच कालोन्नी काट
नाप शहर के ठाटमठाट

पीकै लास्सी उठले जाट
बखत नहीं देक्खै सै बाट

बुरे बखत म्हं चून बी गील्ला
और गई झोट्टी बी नाट

दाने दे कै कुल्फी ल्याया
छोरे के मूंह लगगी चाट

दरवाज्जे के ढेक्कण रोया
नीम तलै तै उठगी खाट

सूरज डूब्या चाल मौदगिल
बालक देख रहें सैं बाट

1 टिप्पणी:

  1. लेखन का आपका यह अंदाज़ अच्छा लगा ! कृपया जारी रखियेगा !

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