behavior="scroll" height="30">हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि सम्मेलन संयोजक एवं हिन्दी-हरियाणवी हास्व्यंग्य कवि योगेन्द्र मौदगिल का हरियाणवी धमाल, हरियाणवी कविताएं, हास्य व्यंग्य को समर्पित प्रयास ( संपर्कः o9466202099 / 09896202929 )

शनिवार, 27 दिसंबर 2008

उस दिन तू कहां थी...............?

एक बर की बात...

ताऊ नै एक घणा जरूरी काम तै मुम्बई जाणा पड़ग्या
ताऊ नै सैच्ची अक् हवाई जहाज मैं चाल्लू ये सोच कै हवाई अड्डे पै पहोंच टिकट ले कै हवाई जहाज पै चढ़न ही वाला था कि अचानक एक बड़े जोर तै उसनै अवाज आई रै ताऊ रुक जा इस जहाज पै ना चढैं यू रास्तै महं क्रैश होण आला सै...
ताऊ सुणते ही वापस हो लिया पर मुंबई जाणा बी जरूरी

ताऊ नै सोच्या चाल फेर रेल मैं चाल्लैं
ये सोच कै रेल के अड्डे पै पहोंच टिकट ले कै रेल पै चढ़न ही वाला था कि अचानक एक बड़े जोर तै उसनै अवाज आई रै ताऊ रुक जा इस रेल पै ना चढैं यू रास्तै महं पटड़ली तै उतरेगी
ताऊ सुणते ही वापस हो लिया पर मुंबई जाणा बी जरूरी

ताऊ नै सोच्या चाल फेर बस मैं चाल्लैं
ये सोच कै बस अड्डे पै पहोंच टिकट ले कै बस पै चढ़न ही वाला था कि अचानक एक बड़े जोर तै उसनै अवाज आई रै ताऊ रुक जा इस बस पै ना चढैं यू रास्तै मैं नदी म्हं गिरेगी
ताऊ सुणते ही वापस हो लिया पर मुंबई जाणा बी जरूरी

ताऊ नै सोच्या चाल फेर रिक्शा मैं चाल्लैं
रिक्शा वाले तै बात करी
रिक्शा वाला बी हरियाणे का था त्यार होग्या जाण नै
ताऊ भाड़ा तै करकै रिक्सा पै चढ़न ही वाला था कि अचानक एक बड़े जोर तै उसनै अवाज आई रै ताऊ रुक जा इस रिक्सा पै ना चढैं यू रास्तै महं टूटण आला सै

ताऊ सुणते ही रिक्सा तै उतर लिया
अर उस अवाज की तरफ हाथ जोड़ कै बोल्या, हे भाई तू कोण सै...? अपना परिचय दे अर न्यू बता अक् तू मनैं बार-बार मुंबई जाण तै क्यू हटावै सै...?

अवाज आई......... रै ताऊ... मैं एक आत्मा हूं.... अर तेरी शुभचिंतक........... मुबई जाण मैं तनै खतरा सै इस लिये मैं तनै बार बार चेतावनी द्यूं सूं ताकि तू बच जै.........

ताऊ बोल्या, हे आत्मा.... सारी बात ठीक सै तेरी.... पर तू मेरी शुभ चिंतक कोनी...!

आत्मा अचरज तै बोल्ली, ताऊ के कह रह्या सै...?

ताऊ बोल्या, री आत्मा, मैं बिल्कुल ठीक कह रहया सूं, क्योंकि यदि तू वास्तव मैं मेरी शुभचिंतक सै... तो न्यू बता जिस दिन मैं घोड़ी पै चढ़ रहा था उस दिन तू कहां थी....?

6 टिप्‍पणियां:

  1. तो न्यू बता जिस दिन मैं घोड़ी पै चढ़ रहा था उस दिन तू कहां थी....? भाई बात तो सॊ टके की पुछी ताऊ ने.... फ़िर इस शुभचिंतक आत्मा ने क्या जबाब दिया...
    बहुत सुन्दर लगी आप की बात, बेचारा हमारा ताऊ.
    धन्यवाद

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  2. मौदगिल जी रामराम,
    घणी चोखी बात कही सै. ताऊ तो सोच मैं पड़ गया होगा अक मुंबई जाऊं तो या आली आत्मा नी जाण देत्ती आर वापस घर जाऊं तो वा आली आत्मा तैयार मिलेगी.

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  3. First of all Wish u Very Happy New Year...

    Sunder rachana

    Regars..

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  4. मोदगिल जी, पोस्ट तो घणी चोखी रही.मजा आ गया.
    इब मेरे कानी तै थानै नवें साल की बोहत बोहत मुबारकबाद.
    ईश्वर से कामना करता हूं कि आप नववर्ष में दिन दूनी रात चौगुनी उन्न्ति करें.
    आपको एवं आपके समस्त मित्र/अमित्र इत्यादी सबको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऎं.

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  5. बहुत बढ़िया चोट की है मौदगिल भाई !

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